International Journal of Technology and Applied Science
E-ISSN: 2230-9004
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Volume 17 Issue 5
May 2026
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भारत के 2019 लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण आधारित मतदान व्यवहार का अध्ययन
| Author(s) | डॉ. राकेश कुमार जायसवाल |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | भारतीय लोकतंत्र की सबसे विशिष्ट और जटिल विशेषताओं में से एक यह है कि यहाँ मतदान व्यवहार केवल नीतिगत मुद्दों, आर्थिक अपेक्षाओं या नेतृत्व के व्यक्तित्व से निर्धारित नहीं होता, बल्कि सामाजिक संरचना, सामुदायिक पहचान, स्थानीय शक्ति-संतुलन और ऐतिहासिक राजनीतिक स्मृतियों से भी गहराई से प्रभावित होता है। इन कारकों में जाति का स्थान अत्यंत केंद्रीय रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव, जिनमें भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत प्राप्त किया, इस बात का महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं कि जाति भारतीय राजनीति में अब भी एक निर्णायक कारक है; किंतु यह प्रभाव अब अपने पारंपरिक रूप से बदलकर अधिक जटिल, बहुस्तरीय और रणनीतिक स्वरूप ग्रहण कर चुका है। 2019 के चुनावों में जातीय समीकरण केवल “एक जाति बनाम दूसरी जाति” की रेखा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दलों ने उपजातीय समूहों, गैर-प्रमुख सामाजिक वर्गों, क्षेत्रीय पहचान, धार्मिक ध्रुवीकरण, नेतृत्व की स्वीकार्यता और राष्ट्रवादी विमर्श के साथ जातीय गठजोड़ का नया संयोजन निर्मित किया। यह शोधपत्र भारत के 2019 लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण आधारित मतदान व्यवहार का समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि जाति ने मतदाता के निर्णय को किस प्रकार प्रभावित किया, किन राज्यों में यह प्रभाव सर्वाधिक स्पष्ट रहा, किन जातीय समूहों ने किस प्रकार मतदान किया, और किस सीमा तक राष्ट्रीय मुद्दे—जैसे राष्ट्रवाद, नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाएँ और विकास—जातीय गणित के साथ अंतःक्रिया करते दिखाई दिए। अध्ययन में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश तथा व्यापक राष्ट्रीय रुझानों के संदर्भ में मतदान व्यवहार का विवेचन किया गया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में भाजपा द्वारा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समूहों के समेकन तथा समाजवादी पार्टी–बहुजन समाज पार्टी गठबंधन द्वारा यादव–जाटव–मुस्लिम समीकरण पर निर्भरता का तुलनात्मक विश्लेषण इस शोध का केंद्रीय भाग है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जाति का प्रभाव समाप्त नहीं हुआ, बल्कि उसने नया रूप धारण किया। भाजपा ने पारंपरिक जातीय ध्रुवीकरण को तोड़ते हुए बहुस्तरीय सामाजिक गठबंधन तैयार किया, जिसमें ऊँची जातियों के अतिरिक्त गैर-यादव पिछड़े वर्गों, गैर-जाटव दलितों और लाभार्थी समूहों को जोड़ा गया। दूसरी ओर, विपक्षी दल अनेक राज्यों में जाति-आधारित गठबंधनों के बावजूद इस सामाजिक पुनर्संयोजन को पर्याप्त रूप से चुनौती नहीं दे सके। इससे यह सिद्ध होता है कि समकालीन भारतीय चुनावों में जाति अब भी निर्णायक है, किंतु उसका प्रभाव नेतृत्व, कल्याण, पहचान-राजनीति और राष्ट्रीय आख्यानों के साथ मिलकर कार्य करता है। अतः 2019 का चुनाव भारतीय लोकतंत्र में जाति की निरंतरता और उसके रूपांतरण, दोनों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। |
| Keywords | लोकसभा चुनाव 2019, जाति, मतदान व्यवहार, पहचान-राजनीति, ओबीसी, दलित, भाजपा, उत्तर प्रदेश, चुनावी समाजशास्त्र |
| Published In | Volume 10, Issue 11, November 2019 |
| Published On | 2019-11-05 |
| Cite This | भारत के 2019 लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण आधारित मतदान व्यवहार का अध्ययन - डॉ. राकेश कुमार जायसवाल - IJTAS Volume 10, Issue 11, November 2019. DOI 10.71097/IJTAS.v10.i11.1268 |
| DOI | https://doi.org/10.71097/IJTAS.v10.i11.1268 |
| Short DOI | https://doi.org/hbwt88 |
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10.71097/IJTAS
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