International Journal of Technology and Applied Science

E-ISSN: 2230-9004     Impact Factor: 9.914

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प्रतीक का स्वरूप व विश्लेषण

Author(s) डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा
Country India
Abstract प्रतीक का अर्थ व परिभाषा- 'प्रकृष्ट तीकने इति प्रतीकम्' अर्थात् अर्थ ज्ञान या अर्थ-प्राप्ति कराने वाले शब्दों को प्रतीक की संज्ञा दी जा सकती है। हिन्दी का 'प्रतीक' शब्द अंग्रेजी 'सिम्बल' का समानार्थक है। व्यवहार में प्रतीक अपनी विशेष लाक्षणिकता के कारण प्रकृष्ट अर्थ की व्यंजना करता है। कविता में इसका प्रयोग उपमान रूप में होता है, किन्तु इसका प्रसार भाषा, साहित्य, कला, धर्म, दर्शन व जीवन तक है।

अंग्रेजी 'सिम्बल' के कोशगत तीन अर्थ है-पहला वह चिन्ह जो किसी वस्तु की व्यंजना करता है; दूसरा स्वेच्छा से प्रयुक्त या परंपरागत संकेत और तीसरा जो किसी अन्य वस्तु का प्रतिनिधि होता है।'
अर्थात् सिम्बल स्वेच्छा से प्रयुक्त या परंपरागत संकेत है, जो किसी अन्य वस्तु के लिए प्रयुक्त होता है। यह किसी विचार या गुण का अपने सम्बंध सूत्रों के कारण प्रतिविधान, द्वष्टान्तीकरण या स्मरण कराने वाली वस्तु है। संस्कृत तथा मलयालम के कोशों में 'प्रतीक' प्रतिबिम्ब के अर्थ में लिया गया है।
Published In Volume 8, Issue 1, January 2017
Published On 2017-01-06
Cite This प्रतीक का स्वरूप व विश्लेषण - डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा - IJTAS Volume 8, Issue 1, January 2017.

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